ज़िंदगी तू कहाँ खो गयी, मैं तुझको ढूँढा करता हूँ,

बचपन बीता और जवानी ढल गयी, जाने कैसी होड़ में,
अपनी मैं में मैं रहा, व्यस्त रहा पैसों की दौड़ में|

ए ज़िंदगी तुझसे हारने वाले हम नहीं 

टूटने के डर से छोड़ दे जो देखने सपना
ए ज़िंदगी तुझसे हारने वाले हम नहीं

पक्षियों की गुहार

अब हम पे सिर्फ एक ऐहसान
कर दो ए दुनियावाले हमें चैन
से रहने दो अब मुझे तो सुखद
सबेरा दे दो ताकि…