भागम भाग ज़िन्दगी

भागम भाग ज़िन्दगी इस भागम भाग ज़िन्दगी में सहारा कोन देना ये मुसाफ़िर हम तो हरे पंछी आज इस डाल पे कल उस डाल पे कभी कही बसेरा कभी कही बसेरा मगर मेरा…

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अधूरी ख्वाहिश  

एक शालीन समाज को सपनों में देखती थी मैं देखकर कुरीतियां समाज की दम घुट रहा था मेरा चाहती थी मैं समाज के लिये कुछ कर पाऊँ अपनी कोशिशों से कुछ परिवर्तन ला…

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सत्य ही सत्य की हार है

सत्य ही सत्य की हार है सत्य ही सत्य का प्रतिकार है जीवन की उन्मुख क्या कहें जीवन की अद्रा को क्या कहें मैं समय हूँ खूद को बलवान समझता है सही है…

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मुनीरी मुनीरी

मेरी मौलिक व स्वरचित रचना " मुनीरी " अवश्य पढ़ें " मुनीरी " चाँद से बिखरने वाली रोशनी से रोशन होती रातो का नाम है मुनीरी , सूरज से निकलने वाली किरन से चमचमाता जहाँ  का नाम…

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तुम हो तो, जिंदगी है

तुम हो तो, जिंदगी है तुम से ही, बन्दगी है तुमसे क्या है, रूठना ये तो इक, दिल्लगी है क्या कहा, तुम्हें मत सोचूँ मेरी तो ये, तिश्नगी है इश्क़ करके कैसे भूलूँ…

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मैं ब्रह्म ज्ञान हूँ

मैं रोज़गार ढूँढ रहा नौजवान हूँ। मैं तो भविष्य देश का हूँ वर्तमान हूँ।।   तू पास फ़ैल का न गुणा भाग कर कभी। घबरा न ज़िन्दगी मैं तेरा इम्तिहान हूँ।।   हर…

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कविता

आज मन करता है। किसी के ख्वाब का शाहज़ादा बन जाएं। आज मन करता है किसी के लबों के हँसी बन जाएं। आज मन करता है किसी के ख्यालों में खो जाएं। आज…

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