anubhav 6

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मज़ाक

By | 2017-02-20T14:19:18+00:00 February 20th, 2017|Categories: कहानी|Tags: |

यूं तो हल्का-फुल्का मज़ाक माहौल को ख़ुशनुमा बना देता है। कभी दिल पर चोट भी करता है, दुनिया देखने [...]

इंसान

By | 2017-02-20T14:17:50+00:00 February 20th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

इसानियत है मर चुकी इंसान कहाँ है भारत की पहले जैसी पहचान कहाँ है । अपने ही बुजुर्गो को [...]

सूत्रधार

By | 2017-02-23T09:59:48+00:00 February 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

बिलखते बच्चों व सिसकती बेवाओं के लिए जिम्मेदार ये आतंकवाद परोसते ,टूटते प्रदेश व  बिखरे देश बिखरते  अरमानों और [...]

बारात 

By | 2017-02-21T02:10:46+00:00 February 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

भाई यह क्या हुआ दस लाख का एक हुआ! बात हुई थी जब बीस लाख की आधे खर्च करोगे [...]

माँ

By | 2017-02-21T02:10:33+00:00 February 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

  माँ मेरी ममता की मूरत गोरी गोरी है जिसकी सूरत बड़े परिवार की थी वो बेटी पर भट्टी [...]

तलाश

By | 2017-02-21T02:14:35+00:00 February 19th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

बारिश मे भीगी हुई वो आज भी याद आती है। उस मिट्टी कि तलाश है जो हर आगन मेहकाती [...]

देखो इन्हें ये है ओस की बूंदे

By | 2017-02-20T12:37:06+00:00 February 19th, 2017|Categories: संस्मरण|Tags: |

#पिंगलवाड़ा (अमृतसर) पिंगल का अर्थ है--(#अनाथ_अपाहिज_बुद्धिहीन) वाड़ा............(#बच्चे) साईकल यात्रा के 7वें दिन,जब हम पिंगलवाड़ा में पहोंचे थे... अंदर का [...]