अनुभव – हिन्दी वेब पत्रिका
हिन्दी लेखक डॉट कॉम की एक उपक्रम

चेतना शून्य

" देखो प्रताप! यूँ तो बहुत सी बातें है जो दिल को कचोटती है, दर्द पहुँचाती है, किन्तु कोई क्या कर सकता है। सब नसीब का खेल है। किसी के नसीब में हीरे…

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बेटी

बेटी जीवन की आन है, परिवार की वह शान है। भाई की वह मान है, माँ की वह जान है।। बाबू की राजदुलारी, माँ के आँखों की प्यारी । भाई के जीवन में…

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दर्द ज़िंदगी के बहुतेरे उनकी …

दर्द ज़िंदगी के बहुतेरे उनकी मीत दवाई लिख। मजलूमी भार हुईअब इसकी कहाँ सुनाई लिख।। चकाचौंध हेरम्बी लकदक फर्श अर्श से बात करे आज कंगूरों की पौ बारह उनकी स्याह कमाई लिख।। सत्य…

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हवाएं सब बताती हैं

मेरे बारें में जो कोई तेरी अल्फाज आती है, हवाएं पास आ करके हवाएं सब बताती हैं। महकता शाम है मेरा, चहकती सुबह आती हैं, हवाएं पास आ करके हवाएं सब बताती हैं।…

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बाबू जी

बच्चों के संग बच्चा बनकर, सदा हँसाते बाबू जी । बच्चों की इच्छाओं को हैं, पूरे करते बाबू जी । जीवन जीतें हैं कैसे , जब हम दुनिया में आतें है। हर मुश्किल…

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मंत्री जी की भैंस

देखिए उनकी भी अर्ज़ी पूरी हो गई, कबीना मंत्री की भैंस चोरी हो गई । ये खबर पूरे प्रदेश में प्रसाद की तरह बटी, कि मंत्री जी के भैंस की सोने की रस्सी कटी।…

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एहसास⁠⁠⁠⁠

हमको हमारे दुख का ये एहसास न होता, सासों की महक तेरी मेरे सांस में होता! बनता नही शायर न यू मैं करता शायरी , बिछुड़ा जो मेरा तुम सा कोई खास न…

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कविता लिखता हूँ…

जब भी मैं कविता लिखता हूँ कलम मेरा देती है संग सच की शुचिता देती सम्बल, शब्द मेरे भर देते रंग | राजनीति का भौंडापन हो या हो प्रीति का अल्हड़पन नहीं चूकती…

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मेरा शहर

एक मेरा शहर है, जहाँ मैं बड़ा हुआ | यहाँ भी लोग, दूर दूर से आकर, काम धंधे की तलाश में बसते हैं | उन्हें भी कभी, मेरे शहर में रहते हुए, अपने…

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मेरे अनंत

मेरे  अनंत अजर अमर पृष्ठों  पर चंपई  कली की गंध  सा लिखा  है नाम तुम्हारा विद्यापति की पदावली सा मीरा की चाहत  जैसा अंकित  है नाम  तुम्हारा राधा  की विरहाकुलता सा गोपीचंद की…

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गिरवी है कलम

सुनो, मैं अब नहीं लिख सकता तुम्हारे साथ हुए जुल्मों-सितम के बारे में नहीं रख सकता अब हिसाब तुम्हारे आँसुओं का लो, दिखना भी बंद हो गया है मुझे वो लाल निशान देख…

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इतना भी आसन नहीं

मुश्किल है निभाना किसी का साथ  जीवन भर के लिए  और, इतना आसान भी नहीं  चल देना किसी अपने को छोड़ कर  तथाकथित उस ज्ञान की तलाश में  जो उस पल कही था…

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रावण का अंत

विभिषण " ने अमृत का स्थान नाभि में बता कर रावण का अंत कराया घर का भेदी लंका ढाया अब के रावणों का "अमृत" कौन बतायेगा! - अनिल कुमार सोनी

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