अनुभव – हिन्दी वेब पत्रिका
हिन्दी लेखक डॉट कॉम की एक उपक्रम
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“काँटा भी , बँटवारा भी”

बचपन की मासूमियत जहाँ खुद के होने का वजूद ही नहीं, फिर भी खुशगवार थी जिंदगी. कितने थप्पड़ माँ बाप से खाये ,रो लिए और फिर वही मासूम सी शैतानियां. मुझे आज भी…

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हिसाब आँखों से दिखाना पडा़

लिख लिख कर हिसाब आँखों से दिखाना पडा़। कमबख्त ना चाह कर भी दुष्मनी निभाना पड़ा। लब्ज तीर से निकले थे दिल को भेदने के लिऐ जमाने के लिऐ हमे हर लब्ज सजाना…

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गांव एक स्वर्ग

रीवा शहर के उत्तर दिशा में लगभग पन्द्रह मील दूर जवा बाजार है। जवा से करीब आधे कोश में गौहाना गांव है। गांव काहे का पूरा स्वर्ग। काफी बड़ा गांव, ढ़ाई सौ घर की…

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सरेआम

  सरेआम अपने इश्क  का यूँ न तमाशा  बनाइये। अपने वजूद का खुद ही ज़रा पता लगाइये।। बेमौत मार डालेंगी हमे ये होशमंदियाँ । गर जीने की आरजू है तो खुद को भुला…

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कोचिंग क्लास

श्रीवास्तव जी की काफी इच्छा थी कि उसका पुत्र पंकज इंजीनियर बने ।पंकज एक औसत दर्जे का छात्र था पर पिता जी के प्रयास से डोनेषन कोटे द्वारा इंजीनियरिंग में एडमिषन हो गया…

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वो बैठे फेसबुक खोले

  नभ चाहें धरती डोले, वो बैठें फेसबुक खोले उंगली करें होले होले,वो बैठें फेसबुक खोले!   दुनिया भर के दोस्त बना दे, ये इण्टरनेट साइट, गीदड़ भी है यहाँ गरजते होकर इकदम…

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मेरी किस्मत ठीक है

घर में सबलोगों के बीच बैठा बैठा ऊब गया था। सोचा बाज़ार ही घूम लिया जाए। इसी विचार से निकला और पहुँच गया बाज़ार। इतवार का दिन बाजार की गहमा गहमी ऐसे होती…

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