अपने जीवन को बचाओ

हमें नहीं काट रहे हो तुम काट रहे हो अपने जीबन को , मुझे मारकर तुम बुला रहे हो अपने मरण को. मैं जैसा भी हूं , तेरे जीवन को बचाता हूं हर…

Continue Reading अपने जीवन को बचाओ

सियासत की निगाहें

सुबह से शाम तक बिजली सड़क पानी की आहें हैं, हमारे वोट पर पूरी सियासत की निगाहें हैं। न जाने कितने सालों से यहां वीरानीयत सी थी, अभी कुछ ही महीनों से विधायक…

Continue Reading सियासत की निगाहें

खेले कान्हा गोकुल होरी,

  खेले कान्हा गोकुल होरी, संग लिये राधा प्यारी। गोपी ग्वाल संग में खेले, देखत सब ब्रज नर नारी।। बरसाने से आयी राधा, संग सभी सखियाँ प्यारी। झूमे नाचे संग मुरारी, छवि लगती…

Continue Reading खेले कान्हा गोकुल होरी,

काश!जी भर के बात कर पाती तुमसे अम्मा

आज सफाई करते हुए पुरानी डाईरी हाथ लग गई सब ठीक से रखी पर डाईरी वापस रह गई ।दोपहर का खाना बनाई फिर अपने सारे काम निपटा धुप में बैठने जाने लगी की…

Continue Reading काश!जी भर के बात कर पाती तुमसे अम्मा

बीता हुआ हर मंज़र बड़ा दिलचस्प दिखता है

बीता हुआ हर मंज़र बड़ा दिलचस्प दिखता है यादों में अपना शहर बड़ा दिलचस्प दिखता है ‍‍~ लौटते हुए …..महीनों बाद के….. सफ़र से मील का हर पत्थर बड़ा दिलचस्प दिखता है ~…

Continue Reading बीता हुआ हर मंज़र बड़ा दिलचस्प दिखता है

बेटी

ज्यों गगन में चान्द चमके बेटी चमके आंगना में बेटिया साडी का आंचल बेटिया आंखों का काजल बेटिया चूडी की खन-खन बेटिया मां का है दर्पण बेटिया पूजा की थाली बेटिया सबसे निराली…

Continue Reading बेटी

कुछ शायरी

तुम मिलो तो एक बार, दिल का हाल जताने के लिये, फ़िर हमें छोड़ किसी और का खयाल दिल मे नहीं आयेगा! …………………. तुम मेरे हो सब जानते हैं, में तुम्हारी हुं कोई…

Continue Reading कुछ शायरी

शोरूम में जननायक

अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने…

Continue Reading शोरूम में जननायक

भोली जनता  

इलेक्शन जब भी आते हैं ,तो भाषण ये सुनाते हैं , कभी  कुत्ते , कभी बिल्ली ,कभी गदहे को लाते हैं .   कि अपनी आपसी बातों में अपने ये बड़े नेता बेचारे…

Continue Reading भोली जनता  

मौसम है बसंती सा   

मौसम है बसंती सा , हवाएं महकी -महकी सी . रंगीं हैं नज़ारे भी , फ़िज़ाएं चहकी- चहकी सी . पड़ी हैं आम पर बौरें भी - आँगन में सुनहरी सी, हवा की…

Continue Reading मौसम है बसंती सा   

लड़का अधिकारी था य भिखारी

 लड़का अधिकारी था, मां-बाप के रंग-ढंग बदल गये थे ! शादी के लिये लड़के की बोलिया लगने लगी थी, जो 40 लाख देगा वो अपनी लड़की ब्याह सकता है, जो 60 लाख देगा लड़का उसके…

Continue Reading लड़का अधिकारी था य भिखारी

बस रस्म भर बचा ,दिल लगाना अब तो

बस रस्म भर बचा ,दिल लगाना अब तो किताबों के किस्से ,टूटके चाहना अब तो प्यार और वफादारी चलन में नहीं लगते है लोग कम रखते , कीमती खज़ाना अब तो दिन ब…

Continue Reading बस रस्म भर बचा ,दिल लगाना अब तो

ज़रा सुनिये नेता जी !

भारत देश दुनिया का क बड़ा लोकतान्त्रिक देश है ,परंतु आजकल यह लोकतंत्र दुनिया के लिए जोकतंत्र बनता जा रहा है .लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है चुनाव  ! कहा जाता है…

Continue Reading ज़रा सुनिये नेता जी !

गधा उदास है

पढ़ लिखकर गदहे ने डिग्री बहुत कमाई , पर उसके बदले उसने नहीं नौकरी पाई। सोचा अबकी लडू इलेक्शन, बन जाऊं मैं मुखिया वोट तो सबकी ले ही लूंगा, रमई हो या सुखिया…

Continue Reading गधा उदास है

एक जन आह्वान

आज देश तैयार खड़ा है रचने को नूतन इतिहास एक नया नेतृत्व दे रहा जुड़ने का अन्तिम आह्वान सब बाधाएँ तोड़ देश को प्रथम पंक्ति में आना है और मुखौटे पहने जो हैं…

Continue Reading एक जन आह्वान