मखमली यादें

दिनभर चुन चुन कर रखी थी हल्की हल्की गरमाहटें धूप के कतरनों से तोड़ तोड़कर शाम होते ही हल्की हो गयी हौलै से उड़कर बादलों के संग हवाओं मे अठखेलियाँ करती जा पहुँची…

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दर्द का एहसास

हर बात पर यूँ आँसू बहाया नहीं जाता , हर बात सबको दिल का बताया  नहीं जाता । सब घूमते हैं आज साथ में लिए  नमक , हर जख्म दिल का सबको दिखाया…

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बुन्द समुन्द

कहीं दूर....मैं खो गया हूँ .... बालपन से बेरोकटोक ढूंढ रहा हूँ ख़ुद को सारे जहां में कहीं मिल जाऊँ तो बताना मुझे भी अथाह जन सैलाब में सब कोई मिला कदम दर…

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बचपन

पानी में कागज की वो नाव चलाना । खेल खेलना और खिलाना ।। मजे करते थे हम भरपूर । छल कपट से थे हम दूर ।। खेल खिलौने हमारी मिट्टी । नाटक में…

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परीक्षा और मुस्कान

बात अभी पिछले वर्ष की ही है, मैं कक्षा दसवीं में पढ़ता था । पढ़ने में अच्छा था और प्रतिस्पर्धा के युग में तो पढ़ाई अधिक ही करनी पढ़ती है । बोर्ड परीक्षा…

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बचपन की यादें

वही लोग फिर याद आने लगे हैं, भुलाने में जिनको जमाने लगे हैं,   वो पानी की बूंदें वो बारिश झमाझम, शहर फिर से लबलबाने लगे हैं,   वो बचपन की यादें वो…

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आग 

कोई किसी आग में कोई किसी आग में जल रहा है कहीं धुआं उठा रहा ह तो कोई निर्धूम जल रहा है पर्दे की ओट में  निशददिन  पल-पल सिसक रहा है साबुत खड़ा…

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उनको देखा है।

कभी तन्हाइयों में ख्वाब पलते उनका देखा है। कभी रातों को नींदो में भी चलते उनको देखा है। कभी तो देख कर परछाइयों में उसको दिल खुश था शाम हो जाते ही परछाई…

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आईना

ये वहीं आईना है जो मुझसे मेरी पहचान करवाता है, ये वहीं काँच का दर्पण है जो मन मन्दिर में ख्वाबों को दिखाता है, हँसी ठिठोली करता है जब सामने इसके जाती हूँ,…

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बेटी

बेटी है आधार जगत का बेटी से है  सार जगत का बेटी देवी, बेटी सीता बेटी बाइबल कुरान और गीता   बेटी में संसार छिपा है जग का सारा  सार छिपा है बेटी…

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सोचो जरा …

तीन बजने को थे। उसके आने का समय हो रहा था।  मगर आज मुझे तसल्ली थी, बेचैनी नहीं।  घर के बगल में साढ़े तीन फीट चौड़े गलियारे में मैंने पूरे सड़क तक कोई…

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अन्धेरा

चला आ रहा है अन्धेरा पेड़ों के उस पार से जो छूपा रहा दिनभर एक अन्नत रोषनी से कभी कम करके नही आंका तुम्हे झेल रहा हूँ तुम्हे एक शोषित किसान की तरह…

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धुआँ धुआँ

धुआँ धुआँ यह किसका धुआँ? जला करते जिसमें तनहाई के जाल, तन मन जला दिए। अपनों का धुआँ हैं, चाह कर कह न सकी दिल की बात घुटन सी लिपटी रही चादरो की…

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