अनुभव मई

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गीता

By | 2017-05-16T16:54:15+00:00 May 16th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

गीता करती बात योग की ! कर देती..... उसको साकार | योग-कर्म-ज्ञान और भक्ति सिखलाकर देती आकार || समत्वयोग [...]

आ जाओ गोरैया

By | 2017-05-17T08:02:51+00:00 May 16th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

आ जाओ गोरैया, मेरी उंगलीयों पर बैठों। उसमे फल,फूल,पत्तीयाँ, तो तुम्हैं नही मिलेगीं। मग़र मेरा वादा हैं,ये उंगलीयां भी। [...]

खन्डहर

By | 2017-05-12T09:02:51+00:00 May 11th, 2017|Categories: कविता|Tags: |

सदियो की गाथा समेटे, उनका दुख कोई न मेटे। खड़े है,बिरान खन्डहर अकेले। युग युग का दुख झेले , [...]