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अनुभव मई Archives - हिन्दी लेखक डॉट कॉम

मैया और मौसी

गैया हमरी मैया है और बिलइया हमरी मौसी इन दोनों को बदनाम करे, पड़ोसन मुँहझौंसी मैया जैसी गैया भैया, हमको तो दूध पिलाती है निज जिह्वा से चाट-चाट, हमको वो दुलराती है मैया…

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गीता

गीता करती बात योग की ! कर देती..... उसको साकार | योग-कर्म-ज्ञान और भक्ति सिखलाकर देती आकार || समत्वयोग से गीता हमको समभाव बतलाती है | मानस से अतिमानस बनना ! ऐसी कला…

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 तेरा हृदय… 

हे  कलियुग  ! तेरे    आगमन     ने दशा ही बदल दी  उसकी, सहने  लगी  है  अब हर   मौसम बेसहारा   बन भटकती  रहती  खुले  में भिखारिन  सी  द्वार -द्वार देखी  जा  सकती भूखी -प्यासी गली…

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डॉगी मेरा यार

वो है बेजुबान, फिर भी बोलता है, एहसासों की भाषा, आता है उसे, प्यार जताना, वो मुझे सिखाता, बोलना प्यार की भाषा.... वो समझ लेता है, मेरी ख़ामोशी को, वजह  जानकर, होंठो में…

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आ जाओ गोरैया

आ जाओ गोरैया, मेरी उंगलीयों पर बैठों। उसमे फल,फूल,पत्तीयाँ, तो तुम्हैं नही मिलेगीं। मग़र मेरा वादा हैं,ये उंगलीयां भी। तुझ पर,कभी नहीं उठेगीं। प्यारी गोरैया लौट आओ,मेरे आँगन में। वहाँ वसुधा की,विशालता तो…

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पशु प्रेम के दोहे

मानव हो निष्ठुर सतत्,खाता है वह मांस ! जिव्हा की ख़ातिर " शरद",लेता पशु की सांस !! हर प्राणी में आत्मा,हर प्राणी में जान ! रक्षा हो हर जीव की,तब ही मानव- मान…

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बिल्ली़

बिल्ली, बैठी रहती है रात को मेरे दरवाजे के देहलीज पर घात लगाए चूहे पर एकांत मौन एकाग्र अपनी भोजन की तलाश में एकनिष्ठ मुझे भी अपनी भोजन की तलाश में एकाग्र और…

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आवारा मसिहा

" अरे यार , कितनी बार कहा है तुम्हे ,दूध डाल देती हूँ रोटी डाल देती हूँ बस ,मेरा पिछा मत किया करो " __ चेतना ने अपने साथ - साथ चलते कुत्ते…

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दे जन्मदात्री

दे जन्मदात्री! जननी सदा, करूँ चरण पूजा तेरी। जग में जन्म दिया तुमने, किया उचित पालन मेरी।। पकड़ हाथ चलना सिखलाती, सिखलायी मीठी बोली। हे जन्मदात्री! जननी सदा, करूँ चरण पूजा तेरी।। धूप…

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कुंडलिया छंद…

सबको है सम्मान से, जीने का अधिकार | पशुओं पर यूँ आप क्यों, करते अत्याचार | करते अत्याचार, मार कर उनको खाते | सींग, दाँत अरु खाल, बेच कर अर्थ कमाते | कहे…

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मोल चुका जाना प्रिये तुम

मोल चुका जाना प्रिये तुम, अनब्याही उन रातों का उन दंशो का, उपदंशों का, उन घातों का प्रतिघातों का मोल चुका जाना प्रिये तुम सुप्त धरा सा जीवन मेरा, बीज नेह का तुमने…

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भिखारिन

फ़टी साड़ी और एक गठरी लेकर कभी अकेले कभी दूकेले वो आती है , हाथ फैलाती है कभी लड़की की शादी , कभी कोई चढ़ावा कभी बीमारी तो कभी सच या छलावा हमें…

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खन्डहर

सदियो की गाथा समेटे, उनका दुख कोई न मेटे। खड़े है,बिरान खन्डहर अकेले। युग युग का दुख झेले , मिट्टी के ए खन्डहर ,अब भी रोते है। बिछड़न से अपनो के दर्द मे…

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