GopalBaghelMadhu

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उर में आता कोई चला जाता

By | 2018-02-12T23:35:02+00:00 February 12th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |

उर में आता कोई चला जाता, सुर में गाता कभी है विचलाता; सुनहरी आभा कभी दिखलाता, कभी बे-रंग कर [...]

कितनी कलियों को जगाया मैंने

By | 2018-02-12T23:34:27+00:00 February 12th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |

कितनी कलियों को जगाया मैंने, कितनी आत्माएँ परश कीं चुपके; प्रकाश कितने प्राण छितराये, वायु ने कितने प्राण मिलवाये [...]